निंदा नहीं !

निंदा, चुगली, बदनामी, पीठ पीछे छुरा भोंपना, और अफवाह फैसलना आदि बातों में लोग व्यस्त हो जाते हैं, यह न जानते हुए कि उनका व्यक्ति, समाज और कार्य परिवेश और अन्य समाजिक रचनाओं पर कैसा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। छोटी बात कही जाने वाली निंदा से लोगों का चोट लगती है, समाज विभाजित हो जाते हैं, कार्य वातावरण शत्रुतापूर्ण और निरुपयोगी हो जाता है। यह छोटी सी पुस्तक निंदा के विषय पर पवित्र शास्त्र की शिक्षा से हमें सावधान करती है, इस जीवनशैली से छुटकारा पाने हेतु हमारी सहायता करती है और निंदा से निपटने के कुछ व्यावहारिक चरण प्रस्तुत करती है।