सच्चाई

आज के संसार में लगभग सभी स्थानों पर भ्रष्टाचार, बेईमानी और रिश्वतखोरी आदि सामान्य बात समझी जाती है| संसार इसी प्रकार से चल रहा है क्योंकि उन्हें उतना ही सिखाया जाता है| वे इससे अधिक नहीं जानते हैं| तौभी यह बहुत दुःख की बात है जब हम बेईमानी, अधार्मिकता और सच्चाई का अभाद परमेश्वर के जब लोगों के मध्य-हम-मसीहियों में देखते है, क्योंकि हमें तो कम से कम इससे बेहतर मालुम है की कैसे चलना चाहिए| हमें मालूम होना चाहिए की कैसे सच्चाई, शुद्दता और दार्मिकता में चलें क्योंकि यह सब हम परमेश्वर के वचन में पढ़ते हैं| यह तो और बुरी बात हो जाती है जब हम अधार्मिकता, बेईमानी और सच्चाई का अभाव पास्टरों, प्रचारकों, शिक्षकों और परमेश्वर के वचन के सेवकों के बीच पाते हैं| हममें से प्रत्येक को उस बिंदु हक़ आना चाहिए जहाँ हम सच्चाई , इमानदारी और खराई के प्रति समर्पित हों उन सब कामों में जो हम करते हैं, और यह पुस्तक उन सब गुणों को हमारे अन्दर विकासित करने का प्रयास करेगी|