बदलाव

हमारा मसीही जीवन पश्चात्ताप से आरम्भ हुआ था, जिसका अर्थ है कि पाप और शैतान के ओर से हमने अपना मन और ह्रदय हटाकर परमेश्वर के और लगाया है। तभी प्रभु ने तुरंत हमारे अन्दर बदलाव कर दिया। हमारा नया जन्म हो गया। हम मसीह में नई सृष्टि बन गए। एक ही क्षण में परमेश्वर ने हमारी आत्माओं में एक सृजनात्मक कार्य किया कि हम अन्धकार से ज्योति में; शैतान के बन्धन से छूट कर मसीह में स्वतंत्र हो गए