समर्पण की सामर्थ्य

आज के संसा में समर्पण एक ऐसा गुण है जो सामान्य रूप से संसार में दुलर्भाता से पाया जाता है| अधिकांश लोग वह करना चाहते हैं जो आसान है और समर्पित लोगों को ढूँढ पाना कठिन है| समर्पण एक अनुशासन है| यह जानगबूझाकर चुनाव करने की प्रक्रिया है| बैबल हमें समर्पित होने के विषय में सिखाती है| प्रभु यीशु ने कहाः ''कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता है| वह एक से प्रेम करेगा और दुसरे से घृणा करेगा, अठाव वह एक से मिला रहेगा और दुसरे को तुच्छ जानेगा| आप परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते '' (मत्ती 6:24)| यीशु कहते हैं की हम इसी प्रकार बनाए गए हैं| मनुष्य के दो परस्पर विरोधाभासी समर्पण नहीं हो सकते | यह पुस्तक समर्पण की सामर्थ्य पर बल देती है और आपको प्रेरित करेगी की आप जो कुछ भी करें उसके प्रति समर्पित हों| अपने आपको समर्पित करने की घड़ी अभी है!