आदर संहिता

सदाचार का सम्बंध नैतिक नियम, मूल्य और सिद्धांतों से है। आचरण के नियम की चर्चा की जा सकती है, उसके दस्तावेज तैयार किए जा सकते हैं, परंतु सदाचार के मानक अपने आपमें उनके पालन की सामर्थ प्रदान नहीं करते। नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का पालन करने की सामर्थ प्रत्येक व्यक्ति के अंदर से आती है। नैतिक रूप से सीधे चलने की हमारी सामर्थ स्वयं प्रभु पर हमारी निर्भरता से और उस अनुग्रह से जो वह प्रदान करता है, आती है। कोई भी आचरण का नियम, कोई सदाचार की शिक्षा, कोई बुद्धिमानीपूर्ण सलाह या निर्देश मसीह सेवक की सहायता नहीं कर सकते जो परमेश्वर के साथ अपने व्यक्तिगत जीवन को गंभीर नहीं समझता।
आदर संहिता
आज कलीसिया में, जहां पर हम में से कई परमेश्वर की सामर्थ के प्रकाशन, अभिषेक, चिन्ह और चमत्कारों, आश्चर्यकर्मों और चंगाइयों, भविष्यद्वाणी और अलौकिक की ओर बढ़ रहे हैं - वहीं जीवन और आचरण के ईश्वरीय मानदंड़ों की बुलाहट लोकप्रिय नहीं है। प्रचारक और सेवक पुलपिद से हटकर जो जीवन बिताते हैं, उसके बजाय, एक घंटे में पुलपिट के पीछे वे कितना प्रगट कर सकते हैं, इसके आधार पर उन्हें खोजा जाता है।
हम मसीह के सेवकों के लिए अब समय आ गया है कि हम सेवकाई के उन मानकों को स्थापित करें जो “भक्ति और भयसहित हैं)...जिससे परमेश्वर को प्रसन्नता हो” (इब्रानियों 12:28)। यह पुस्तक इसी विषय पर चर्चा करती है - मसीही सेवा में कार्यरत स्त्री और पुरुषों के लिए आचार संबंधी मूल्य, ईश्वरीय मानदंड और व्यवहारिक ज्ञान का सरल संकलन। इस पुस्तक को पढ़कर आपका जीवन और सेवकाई समृद्ध होंगे।
यह पुस्तक बाइबल कॉलेज, सेमिनार, बाइबल प्रशिक्षण केन्द्र और मसीही सेवकाई में स्त्री और पुरुषों को प्रशिक्षित करने वाले हर कार्यक्रम के लिए उपयुक्त सामग्री है। यह पुस्तक पास्टर्स कॉन्फ्रेन्स और सेमिनारों में सिखाने के लिए उपयुक्त हस्तपुस्तिका साबित होगी। अपनी सेवा टीमों को सिखाते और प्रशिक्षण देते समय पासबान और अन्य मसीही अगुवों के लिए यह उपयोगी पाएंगे।